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Kos Kos Shabdkosh Rakesh Kayasth

Kos Kos Shabdkosh

Rakesh Kayasth

Published March 11th 2015
ISBN :
Paperback
144 pages
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 About the Book 

इसे आप हिंदी की पहली मौलिक डिकशनरी कहें, थिसॉरस, वयंगय निबंधों का संगरह या कुछ और, लेकिन एक बार पढना शुरू करेंगे तो बिना खतम किए छोड नहीं पाएँगे। हिंदी के सामाजिक-राजनीतिक परिवेश में इसतेमाल होनेवाले पचास परचलित शबदों की निहायत ही अपरचलित परिभाषाओंMoreइसे आप हिंदी की पहली मौलिक डिक्शनरी कहें, थिसॉरस, व्यंग्य निबंधों का संग्रह या कुछ और, लेकिन एक बार पढ़ना शुरू करेंगे तो बिना खत्म किए छोड़ नहीं पाएँगे। हिंदी के सामाजिक-राजनीतिक परिवेश में इस्तेमाल होनेवाले पचास प्रचलित शब्दों की निहायत ही अप्रचलित परिभाषाओं और व्याख्याओं की किताब है, कोस-कोस शब्दकोश। परिभाषाएँ कुछ ऐसी हैं कि आप हँसी रोक नहीं पाएँगे या कई जगहों पर ठहर कर गहरी सोच में डूब जाएँगे। हिंदी के आम पाठक से बोलती बतियाती ये किताब सम-सामायिक विसंगतियों पर गहरी चोट करने के साथ भरपूर मनोरंजन भी करती है।